मनुष्य के विचार और संकल्प सामर्थ्य उसे उंचाइयो पर पहुंचा सकते है ...

समयचक्र मनुष्य की विचारशक्ति मनुष्य से कहती है की तुम मुझे अपने मन के जेल खाने में गला घौट कर मत मारो वरन कुछ कार्य कर शरीर के कार्यो के द्वारा उसे बाहर निकालो और अपनी विचार शक्ति को बाहय जगत में बाहर आने दो . मनुष्य खुद जो भी चाहे उत्तम लेखक योग्य वक्ता उच्च... [पूरी पोस्ट]
writer महेन्द्र मिश्र
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[10 Mar 2010 09:01 AM]

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