पुरवा सुहानी आई रे...थिरक उठते है बरबस ही कदम इस गीत की थाप सुनकर

आवाज़ ओल्ड इस गोल्ड शृंखला # 369/2010/69 'गीत रंगीले' शृंखला की नौवीं कड़ी के लिए आज हमने जिस गीत को चुना है, उसमें त्योहार की धूम भी है, गाँव वालों की मस्ती भी है, लेकिन साथ ही साथ देश भक्ति की भावना भी छुपी हुई है। और क्यों ना हो जब भारत कुमार, यानी कि हमारे... [पूरी पोस्ट]
writer सजीव सारथी

sujooi chatterjee

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[10 Mar 2010 08:00 AM]

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