धोती-जब्बा पगड़ी

काव्य कलश धोती-जब्बा-पगड़ीमाथे पर तिलक और चोटीगले में मालाराम-नाम का दुषालागायों को चराने के लिएलूटेरों को डराने के लिएहाथ में लठयह सब कुछ देखविगत कुछ वर्शों सेषहरों के कई लोगमुझे इस तरहां देखतेजैसेमैं उनकी टी टेबल पर पड़ा हूँ कल का उपेक्षित अखबारवे हॅसते हुए देख... [पूरी पोस्ट]
writer amritwani.com

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[10 Mar 2010 07:32 AM]

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