एक पुरानी यात्रा की यादें - ४

वैतागवाड़ी (पिछली पोस्ट से आगे)अगले दिन होली है और मैंने उनकी नाप के कुरते पहले ही से ले कर रखे हैं। दोनों के चेहरों पर पहला रंग घर में ही लगाया जाता है। फिर लोगों का आना शुरू होता है और शुरूआती हिचक और संकोच के बाद दोनों ने रंग लगाने और गले मिलने का तरीका सीख लिया... [पूरी पोस्ट]
writer Ashok Pande
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[10 Mar 2010 06:30 AM]

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