आवाज का निराला अंदाज (अविनाश वाचस्पति)
आवाज का साम्राज्य बढ़ रहा हैजिससे ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा हैबढ़त और चढ़त प्रत्येक शै की हो रही हैगिर रहे हैं संस्कार और मूल्यउससे भी अधिक तेजी से।आवाज ही आवाज है चारों ओर कुछ गिरता है तो आवाज होती हैजहाज उड़ता है तो ...उससे पहले स्टार्ट करें कुछ भीतो...
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अविनाश वाचस्पति
आवाज
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[10 Mar 2010 04:07 AM]



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