ज़रुरत मानसिकता बदलने की
हर तरफ जय महिला जय महिला..का शोर है.....मेरी महज़ इतनी सी इल्तिजा है कि सिर्फ कविता लिखना या शोर करना हम सबका न हो मक़सद..अपनी कोशिश हो कि सूरत बदलनी चाहिए.बहुत पहले लिखी एक कविता अपने संकलन उर्फ़ इतिहास से आप सभी के लिए...उन अनाम लड़कियों के...
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शहरोज़
कविता
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[08 Mar 2010 11:30 AM]



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