के .....खुदगर्जी का सफ़र तो जारी रहेगा .....
स्टोर भी बड़ी अजीब शै है .... ....सजायाफ्ता मुजरिम सा अलहदा किसी कोने में खामोश खड़ा रहता है ..... भीतर कई अफ़साने छिपाये..... .हर सामान जैसे एक रिश्ते का नाम लिए बैठा है.....यूं भी जो चीज ढूँढने जाओ वो मिलती नहीं ... उधर कुछ गिरा है ..... बायो केमिस्ट्री...
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डॉ .अनुराग
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[10 Mar 2010 00:20 AM]



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