“नये-नये कुछ पेड़ लगाना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
प्राण-वायु को देने वाले.जन-जीवन के हैं रखवाले।धरती का श्रंगार सजाना,नये-नये कुछ पेड़ लगाना।।खट्टे-मीठे, रंग-रँगीले,फल देते ये बहुत रसीले।आँगन-बागों की शोभा हैं,हरे-भरे हैं पेड़ सजीले।।उपवन में हँसते मुस्काते,सुंमन हमारे मन को भाते।वातावरण सुगन्धित...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[09 Mar 2010 23:12 PM]



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