संत कबीर वाणी-भोजन प्राप्त करना मनुष्य का अधिकार (bhojan aur manushya-sant kabir ke dohe)

शब्दयोग सारथी-पत्रिका अमल आहारी आतमा, कबहुं न पावै पार।कहैं कबीर पुकारि के, त्यागो ताहि विचार।।कबीरदास जी कहना है कि नशे का सेवन करने वाले इस संसार रूपी दरिया को कभी पार नहीं कर सकते। अतः नशीली वस्तुओं का सेवन त्याग देना चाहिए। छाजन भोजन हक्क है, अनाहक लेय।आपन दोजख जात है, और... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

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[09 Mar 2010 22:35 PM]

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