फख्र है बेटियों पर!

यथार्थ बेटे और बेटियों के सवाल पर समाज ने हमेशा है प्रश्नचिन्ह खड़े किये हैं। आज भी मैं और मेरा परिवार गाहे बगाहे इस बात पर कटाक्ष सुनते रहते हैं लेकिन ये यथार्थ है कि मेरे संयुक्त परिवार में दो भाइयों के बीच पांच बेटियां हैं। इनके बड़े होने के पहले कोई कहता... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव
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[05 Feb 2010 01:26 AM]

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