कोई दर्द जो दिल में होता है!
-उमेश पाठकचेहरे से बयां हो जाता है,अफसाना जो न दिखता है,कोई ग़मगी हो चुप रहता है ,कोई दर्द की गजलें लिखता है,कही कोई आहें भरता है ,कही कोई गुमसुम रोता है,कोई दर्द जो दिल में होता है, कोई दर्द जो दिल में होता है!भूली बिसरी सी चाहो में ,जेहन की पुरानी...
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Umesh Pathak / उमेश पाठक
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[09 Mar 2010 21:20 PM]



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