वो पुरानी चौखट की याद
उस दिन धूप अच्छी थी ठंड के दिन जो शुरू हो चुके थे। ठंड की धूप बूढ़े हो चुके जिस्म पर पड़ती तो काली-सफेद चमड़ी सिक कर लाल-काली हो जाती। याद है, उस दिन उम्र के सफर में पक चुके दो जिस्म धूप में चमड़ी काली करने के बाद जैसे ही घर की ड्योढ़ी चढ़े थे उसमें से...
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Nitish Raj
समाज
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[09 Mar 2010 20:42 PM]



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