भक्ति ज्ञान सरिता

कसौंधन दर्पण मार्ग चलत मोहि मिल गए ज्ञानी । उन प्रभाव ते मम कठोर उर, होगयो पानी पानी ।। ज्ञानी गुरू मम भये, और मै उनको शिष सानी । दीप ज्ञान को मिलो, दियो तेज बड दानी ।। मै, नहिं जानी, फेर हुआ का मम जीवन प्रभु जानी । जीवन बदलो, स्‍वंय बदल गयो, ध्‍यान रही गुरू बानी... [पूरी पोस्ट]
writer बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता

काव्‍य

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[21 Feb 2010 02:49 AM]

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