भक्ति ज्ञान सरिता-2
जन लो, सदगुण को आधार । जग रहि सब दिन अवगुन कीन्हा, अब तो सोच विचार ।। छोड कुसंगत करि सत्संगत, गुन लहु सबहि प्रकार । तहि जानिहों असली ज्ञानी, बुरे कर्म तजि डार ।। चल सुमार्ग लखि लक्ष्य आपुना, पथ करि दे उजियार । चन्द्रभानु निज किरनन से कर, दूजन को...
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बृजेन्द्र कुमार गुप्ता
काव्य
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[21 Feb 2010 02:49 AM]



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