भक्ति ज्ञान सरिता-2

कसौंधन दर्पण जन लो, सदगुण को आधार । जग रहि सब दिन अवगुन कीन्‍हा, अब तो सोच विचार ।। छोड कुसंगत करि सत्‍संगत, गुन लहु सबहि प्रकार । तहि जानिहों असली ज्ञानी, बुरे कर्म तजि डार ।। चल सुमार्ग लखि लक्ष्‍य आपुना, पथ करि दे उजियार । चन्‍द्रभानु निज किरनन से कर, दूजन को... [पूरी पोस्ट]
writer बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता

काव्‍य

views
8
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Feb 2010 02:49 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix