भक्ति ज्ञान सरिता - 4

कसौंधन दर्पण करहु कृपा करूणा के सागर । दीन दयाला दु:ख हर्ता, सफल गणों के आगर ।। तुम अनाथ के नाथ, आपहि अब मोहि देऊ । बिन माझी नइया मोरी अटकी, रेत बीच कस खेऊ ।। कृपा सिन्‍धु बाढहु जल लेकर, बिन जल नहि स्‍नेहू । चन्‍द्रभानु चालक जल पावें, दूसर कोई न गेहू ।। धन्‍य भयो... [पूरी पोस्ट]
writer बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता

काव्‍य

views
5
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[21 Feb 2010 02:48 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix