लाल का कमाल

कसौंधन दर्पण लाल ही लाल ये दुनिया, रे मूसक तु हि बता रे । कौन सा ठौर है ऐसौ, जहॉं नहिं लाल बसा रे ।। फिरते मारे क्‍यों है ? बनती नहिं कोई बात । धन के पिछे भागे क्‍यों है ? सह के हर हालात ।।कहीं किसी के साथ, जनम तक सात दिया रे । लाल ही लाल ये दुनिया, रे मूसक तु हिं... [पूरी पोस्ट]
writer बृजेन्‍द्र कुमार गुप्‍ता

काव्‍य

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[21 Feb 2010 02:48 AM]

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