मातृ कृपा
मॉ ममता महान हम जानी । सेवत सहि दु:ख शिशु आपुनो, कबहुँ नाहि उकतानी ।। ऐसो प्रेम देत कौन भला, दीन्हों मॉं सहि हानी । कोई बडो न मातृ पूजा से, कह गए अस सब ज्ञानी ।। मातृ ममत्व, सुत सुकृन्त ते, सदगुन सबही गानी । चन्द्रभानु एक सपूत ही, धर उजियारा लानी ।।...
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बृजेन्द्र कुमार गुप्ता
काव्य
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[21 Feb 2010 02:47 AM]



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