कैसे बयां करूँ

अनजाना पथिक सुबह की इस आगाज को मै कैसे बयां करूँ,रात के उस अंदाज को मै कैसे बयां करूँ,,डराती है अन्धेरें में खड़ी एक परछाई मुझे,उस परछाई के राज को मै कैसे बयां करूँ,,आज जिस कदर अकेले में जिए जा रहा हुं मै,तन्हाई की इस आवाज को मै कैसे बयां करूँ,,देखता हूँ अपने चारों... [पूरी पोस्ट]
writer Shivam

कविताएँ

views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[20 Feb 2010 06:26 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix