यथार्थ!!!
छीनता हो स्वत्व कोई, और तुम , त्याग तप से काम लो यह पाप है ,पुण्य है, विछिन्न कर देना उसे , बढ़ रहा तेरी तरफ जो हाथ है!!!! दिनकर की इन्ही पंक्तियों से सीख लेने की...
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Shivam
चिंतन
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[20 Feb 2010 06:08 AM]



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