कोशिश!!

अनजाना पथिक आज मैंने देखा उसे, जो चीख चीख कर पुकार रही थी !बह रहे थे अश्रु उसकी आँखों से, वो निहार रही थी !आँखे फेरे मैं  भी, बढ़ चला था औरों कि तरह, पर वो निरीह सी, मृतप्राय, रुन्धें  स्वर से कराह रही थी !याद आया कि जाना है... [पूरी पोस्ट]
writer Shivam

कविताएँ

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[20 Feb 2010 06:00 AM]

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