विमर्श...

अनजाना पथिक  समर शेष है, नहीं पाप का भागी केवल ब्याध !जो तटस्थ हैं, समय लिखेगा उनका भी अपराध !!          अपने प्रिय कवि रामधारी सिंह "दिनकर"  की इन्हीं पंक्तियों से प्रेरणा लेते हुए मैंने तटस्थता का चोला अब... [पूरी पोस्ट]
writer Shivam

चिंतन

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[20 Feb 2010 06:07 AM]

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