अमन की आस

मेरी कहानियां बहुत कोशिश करता हूँ ...अपने जख्मों को भूल जाऊं ,पर वो नासूर बन कर बहता ही रहता है लाख मलहम लगता हूँ ........पर ठीक ही नहीं होने देते हैं लोग ,यह कोई और नहीं हैं ,मेरे अपने ही हैं । उसका नाम सलीम था ,उसकोअपने नाम से बड़ी चिड है .....हर तीसरे का नाम जो सलीम... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार

अमन

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[15 Feb 2010 05:14 AM]

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