उम्र सत्तासी की दिल बचपन का

मेरी कहानियां उसकी जिंदगी में बहुत सूना पन था ,उसकी लड़ाई अपनों से थी .पूरा घर भरा हुआ था ,सब अपने में मस्त थे ,बेटे ,बेटी ,बहु ,नाती ,पोते | सब तो थे फिर भी अकेला था |वक्त पे खाना मिल जाता चाय मिल जाती ,पर कोई ठीक से बात नहीं करता ,एक अखबार ही उसका साथी था जो शाम तक... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[19 Feb 2010 05:23 AM]

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