सत्तू

मेरी कहानियां हम सभी को ,इस शहर में रहते हुए करीब चार महीने बीत चुके थे । कोई काम अभी तक नहींमिला ,बी .ए .तक की पढाई बेकार सी हो चुकी थी । कहीं भी मेरे लायक काम नहीं था ,बड़ी उम्मीदसे मुम्बई आया था । कुछ काम मिल जाएगा तो अपने परिवार का पेट पाल सकूंगा । रोज एक दिनकल की... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[24 Feb 2010 00:34 AM]

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