मुठ्ठी भर उजास
दूर गहरे सिंदूरी रंग का सूरज क्षितिज की रेखा को छू रहा है ,ओर इसी सिंदूरी सूरज के सामने से कभी कभी घर लौटते हुए हुए परिंदो का कोई झुंड उड़ता हुआ निकलता है तो एसा लगता है मानो एक बड़े सिंदूरी से मेज़पोश पर किसी ने परिंदों...
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पंकज सुबीर
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[18 Feb 2010 09:16 AM]



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