ankh dokha hai kya bharosa hai
जो दिखता है वो होता नहींजो होता है वह दिखता नहींभरोसा जिंदगी का फलसफा नहींयहां तो धोखा ही सिर्फ सांस लेता है मेरी कब्र पर बरसा के पानी क्या जता रहे हैं आप (खुदा)क्या ये मेरी प्यासी जिंदगी को गीला करने की कोशिश हैइस रेगिस्तान में भी टायर के निशान...
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Ajayendra Rajan
natgeo
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[14 Feb 2010 03:43 AM]



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