बस इतना सा ज़र्फ़ मुझे देना दाता !
जीवन के झंझावातों से क्या डरनापथ में बाधाओं की चिन्ता क्या करनासंकट के भुजपाश मिलें तो रोना क्योंमुश्किल हो यदि लक्ष्य तो साहस खोना क्योंक्षण भर भी न रहूँ व्यर्थ की बातों मेंहिम्मत की पतवार थाम लूँ हाथों मेंलेकर प्रभु का नाम, राह पर डटी रहूँमन में रख...
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काव्य
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[08 Mar 2010 04:19 AM]



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