तेरे तसव्वुर से मैं कह पाता, मैं वो सब जो कहना भूल गया

जीवन के पदचिन्ह तुम जाओगे तो क़यामत होगी, रुक जाओगे तो क़यामत होगी हाय! इसी कशमकश में,  मैं तुझसे हाल-ए-दिल कहना भूल गयाकाश थाम कर यादों का आइना, पलट कर कुछ वक्त के पन्ने,तेरे तसव्वुर से मैं कह पाता, मैं वो सब जो कहना भूल गया वो रब्त जिसे बाँध न... [पूरी पोस्ट]
writer Sudhir (सुधीर)

मैं

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[09 Mar 2010 14:00 PM]

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