खुद से मिलना

संवेदना : एक एहसास एक दिन शाम को मैं गंगा किनारे बैठा हुआ था. थोडा उदास सा शांत. जीवन के प्रति पस्च्मुखी सोच से ग्रसित. मैं अपने अतीत कि खुशियों को याद कर रहा था. वर्तमान से दुखी (अपरिचित) , अतीत में जीना अच्छा लगता था. ऐसा लगता था कि जब वापस गाँव  जाऊंगा तो फिर... [पूरी पोस्ट]
writer saurabh
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[09 Mar 2010 11:46 AM]

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