एक कवि की प्रेम कविता जिसे उसके बुढ़ापे में देखा था

जनपद विख्यात जनकवि नागार्जुन को मैंने उनके बुढ़ापे में देखा था। कोलकाता में उनसे अच्छी मुलाकातें भी हुईं - कई बार, कई दिनों तक। बहुतेरे दूसरे लोगों की तरह मैं भी उन्हें बाबा’ कहता था। यहां मेरे जन्म से एक साल पहले यानी 1957 में लिखी उनकी एक प्रेम कविता... [पूरी पोस्ट]
writer अरविन्द चतुर्वेद
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[09 Mar 2010 10:35 AM]

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