...मुसीबतों के सात दिन
मुआफ करें। पिछले दिनों मैं एक संस्मरणनुमा –मौत- के नाम से लिखना शुरू किया था। तीन किस्तें लिखने के बाद कुछ ख़ास वजह से उसे जारी नहीं रख पाया। आपने पुराना पढ़ा या नहीं, लेकिन इन सबको संक्षेप में लिखते हुए एक ही किस्त में पूरा कर रहा हूंः संजीवनाम चाहे कुछ...
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संजीव
कभी-कभार
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[09 Mar 2010 09:49 AM]



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