भीड़ का चेहरा

साहित्य सर्जक भीड़ का चेहरा बदली नही है भीड़ वर्षों वर्ष चलते हुए भी वही लोग हैं उस में वही चल है उन की और उन्ही नारों की तख्तियांउठाये हुए हैं वे हाथों में किसी ने भी नही की है कोशिश इसे रोकने की कुछ पूछने की या आगे जो बहुत बड़ी खाई है उसे बताने की बिलकुल कोशिश नही... [पूरी पोस्ट]
writer vedvyathit
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[09 Mar 2010 09:15 AM]

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