छोट लोक - सुभाष चंद्र

कतेक रास बात छोट लोक धरती पर जन्मैत छैथदूबि जकाँ बढ़ैत छथिपयर सँ दबाओल जाइत छैथआ कोनो चर्च के मारल जाइत छैथ !पैघ लोक आकाश मे जन्मैत छैथआकाशे मे रहैत छैथजमीन की होइछओ नहि जनैत छैथ !बाचल, मध्यमजे नहि कर्ता आ नहि पाचकदूनू अधिकार सँ तिरोहितओ उगैत छैथ,बढ़ैत छैथ लत्ती जकाँ... [पूरी पोस्ट]
writer करण समस्तीपुरी

कविता

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[09 Mar 2010 08:12 AM]

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