धर्म या जाति....!(कविता)

kunwarji's आज समाज धर्म या जाति के भंवर में ऐसा फंसा हुआ है कि उचित-अनुचित की सुध-बुध ही खो सी गयी है!धर्मान्तरण पर तो चर्चा खूब जोर-शोर से होती है लेकिन इस पर गौर नहीं किया जाता के ये हो ही क्यों रहा है!यदि हम देखे तो जो हिन्दू बहुत गरीब या अनपढ़ है वो ही धर्म... [पूरी पोस्ट]
writer kunwarji's

dharm ya jaati.

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[09 Mar 2010 07:36 AM]

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