जीवन...... या जानी-समझी बेहोशी .
हृदय में अजीब सी खिन्नता नजर आती है,ऐसा नहीं है कि आसपास व्यस्तता का अभाव हो ,बात तो यही है ये व्यस्तता आखिर चाह क्या रही है. शांत भाव से यदि अवलोकन किया जाये तो हम पते है , कि कोई कथनी में मगन है तो कई करनी में ......... लक्ष्यों कि...
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रूपम
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[09 Mar 2010 04:39 AM]



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