अपनों के गुनाहगार हो गये
हम खुद ही अपने गुनहगार हो गये।प्यार और भरोसे में गिरफ्तार हो गये।।अब किससे कहें हाल-ए-दिल अपना।जब गैर अपने सब यार हो गये ।।हम दोस्ती का दम भरते नहीं थकते थे ।और अब हम दोस्तों की नजरों में गुनहगार हो गये ।।हक है हर किसी को अपनी जिंदगी जीने का ।क्या...
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भारत मल्होत्रा
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[09 Mar 2010 04:38 AM]



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