मीठा मीठा गप्प, कड़वा कड़वा थू।................घुघूती बासूती

घुघूती बासूती वाह, आरक्षण के पक्षधर अचानक उसके विरोधी हो गए! जब आरक्षण खुद को नौकरी में मिलना था तब तक उसके लिए युद्ध में डटे हुए थे। तब उसके विरोधी सामाजिक न्याय के विरोधी दिख रहे थे, अकेले मलाई खाना चाहने वाले लगते थे। तब आरक्षण समर्थक चाहते थे कि अगड़ी जाति वाले... [पूरी पोस्ट]
writer Mired Mirage

आरक्षण

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[09 Mar 2010 04:03 AM]

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