इन्हें स्वामी, संत या बाबा कहकर धर्म को बदनाम न करें
जमियत उलमा-ए-हिन्द की मेरठ कान्फ्ऱेंस में आज मौलाना अरशद मदनी साहब के ऐतिहासिक महत्व के भाषण को सुनने का अवसर मिला। इस भाषण का हर-हर शब्द याद रखे जाने के योग्य है, लेकिन आज का लेख इस विषय पर संभव नहीं है। 8 मार्च 2010 का दिन भारत के इतिहास में बेहद...
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Aziz Burney
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[09 Mar 2010 03:37 AM]



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