ग़र होश जरा सा अब तक है फ़ाग़ी.. होश तू अपना तौल !

बस यूँ ही निट्ठल्ला लगा कि ये साल वी सुक्खा-सुखियाँ ही निकल जाने को है, पर वह न हुआ । अपना आज कुछ ऎसा डौल लग गया कि, लगदा है आज सब बेडौल ही लिक्खा जावेगा । ऒऎ कोई नहीं, वो तो जैसे ही सन्दीप ने एक ठोका, यो लाग्या कि अब आगया मौका. लेकिन जैसे ही भाई परभजोत ने शेष आगे..>... [पूरी पोस्ट]
writer डा. अमर कुमार
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[05 Mar 2010 15:54 PM]

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