जंगल चल कर शहर आ गए
ये जंगल के इलाके नही हैं. न ही ये किसी राज्य के पहाड़ियों के पार बसे आदिवासी हैं जो माओवाद के नाम पर घाव बन चुके हैं. यहाँ टाटा एस्सार जैसी बहुराष्ट्रीय कम्पनियों ने जमीन अधिग्रहण के लिये लोगों का विस्थापन अभियान भी नही चलाया है. सर्वजन हिताय का नारा...
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[09 Mar 2010 01:06 AM]



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