ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है

धान के देश में! सठियाने की भी एक सीमा होती है पर ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है। कब्र में पाँव लटकाये बैठा है पर ब्लोगिंग का शौक नहीं गया। है तो पिद्दी जैसा पर अपने आपको बहुत बड़ा ब्लोगर बताता है। अकल तो ऐसी है इसकी कि कहे खेत की और सुने खलिहान की पर कमली... [पूरी पोस्ट]
writer जी.के. अवधिया
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[08 Mar 2010 23:22 PM]

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