‘‘डस्टर’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नन्हें सुमन विद्यालय अच्छा लगता, पर डस्टर कष्ट बहुत देता है। पढ़ना तो अच्छा लगता, पर लिखना कष्ट बहुत देता है।। दीदी जी तो अच्छी लगतीं, पर वो काम बहुत देती हैं। छोटी से छोटी गल्ती पर, डस्टर कई जमा देतीं हैं।। कोई तो उनसे यह पूछे, क्या डस्टर का काम यही है? कोमल हाथों... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
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[08 Mar 2010 23:05 PM]

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