धर्म की आड़ में!

मेरी सोच क्या इतने ऊपर जाकर भी नारी किसी की नजर में आज भी उपभोग की वस्तु बन कर रह रही है कि जब तक उसका मन चाहा उपभोग किया और जब ऊब गए तो जब चाहा छोड़ दिया। दूसरी औरत जो उसकी जिन्दगी में आ जाती है। उस पत्नी को कानूनी पत्नी का हक़ दिलाने के लिए सबसे आसन और त्वरित... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव
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[22 Dec 2008 01:36 AM]

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