लोकतंत्र के टूटते आधार!

मेरी सोच कहीं पढ़ा की 'कल्याण सिंह' फिर भाजपा में शामिल होने के बाद ६ दिसंबर को 'जय श्री राम ' बोलेंगे। ये तथाकथित नेता अपने को समझते क्या हैं? लोकतन्त्र को मजाक बना कर रखा है। जब जहाँ चाहे मुंह उठाकर चल दिए, क्योंकि चुनाव तो साम दंड से जीत ही चुके हैं और वे अपने... [पूरी पोस्ट]
writer रेखा श्रीवास्तव

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[25 Nov 2009 02:57 AM]

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