संबोधन - कितने अपने और कितने पराये!
समाज में परिवार , मित्र और औपचारिक परिचय सबमें एक तारतम्य होता है और इसके लिए ही सामाजिक संबंधों का अपना महत्व है। हमारी संस्कृति में पुरातन काल से ही और गांवों में आज भी धर्म जाति से परे एक सम्बन्ध बना होता है । अगर जमादारिन है तो उसको भी चाची के संबोधन...
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रेखा श्रीवास्तव
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[26 Dec 2009 03:24 AM]



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