मेरी माँ
माँ होती ही ऐसी है, कि जब पास हो तो कदर नहीं होती और जब न हो तो उसकी कीमत पता चलती है।सभी की तरह मेरी भी माँ है। उसके पास जब मैं था तो मुझे उसके होने का एहसास नहीं था ,पर जब मैं आगे की पढाई करने अल्लाहाबाद चला आया तो धीरे धीरे उनकी कमी खलने लगी। ये तो...
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saurabh
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[29 Jan 2010 11:25 AM]



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