मंजिल
प्रतीक्षा के कॉलेज का पहला दिन था, वह अपने पिताजी के साथ डी. ए. वी कॉलेज की ओर बस में जा रही थी.वह मन- ही-मन बहुत खुश थी,बस की खिडकियों से बाहर झाँककर प्रकृति की स्वछंद छटा का आनंद उठा रही थी .वह सोच रही थी कि आज के बाद उसे कभी भी स्कूल में होने वाली...
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अलका सैनी
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[06 Feb 2010 20:34 PM]



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