फिर जुड़ गया होम्योपैथी से
सालों पहले, यानि वर्ष 1997 और उससे पहले मेरे दिन के कुछ घंटे चाहे-अनचाहे होम्योपैथी के साथ गुजरते थे। रोग हो या न हो, सत्यव्रत सिद्धांतावलंकार, बोरिक और नैश पढ़ने को मिल जाते थे। कई बार क्लार्क की रैपरेटरी के पन्ने भी उलटने पड़ते। यह सब होता मेरे...
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सिद्धार्थ जोशी Sidharth Joshi
माधोदासजी व्यास
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[08 Mar 2010 15:33 PM]



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