इंसानियत गढती है स्त्री...किन्तु
हमे महिला और पुरुष में कोई मतभेद नही करना चाहिए, वे सिर्फ शारीरिक रूप से अलग है. बापूजी कि बात आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है जितनी पहले थी. आज भी हमारे समाज में महिलाए कई तरह के भेदवाव का शिकार होती है. मै बापू के विचारों कों एवं उनके अर्थो...
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HEY PRABHU YEH TERA PATH
मेरेविचार-शुभकामनाऐ
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[08 Mar 2010 15:02 PM]



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