कर्जे और किश्तों में जिंदगी-आलेख और कविता (loan and lifr-hindi article and poem)

 हिन्द केसरी-पत्रिका आजकल कर्जे लेकर सामान खरीदने का एक रिवाज चल रहा है। अमीर न होने पर भी वैसा दिखने वालों की चाहत पूरा करना आसान हो गया है। किश्तों पर अपने लक्ष्य की किश्ती चलाना आसान लगता है पर उसे निभाना उतना सहज नहीं रह जाता। एक आम मध्यम या निम्न वर्गीय व्यक्ति के लिये... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[08 Mar 2010 12:33 PM]

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